परिवार में हुई त्रासदी को पीछे छोड़ वेदा कृष्णमूर्ति का डब्ल्यूपीएल से दमदार वापसी का लक्ष्य

नयी दिल्ली, आठ दिसंबर (भाषा) पिछले तीन साल में परिवार में बड़ी त्रासदी झेलने के साथ भारतीय टीम में जगह बनाने में विफल रही बल्लेबाज वेदा कृष्णमूर्ति का लक्ष्य महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) के आगामी सत्र के जरिये राष्ट्रीय टीम में वापसी करने का है।. वेदा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को शुक्रवार को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि मेरे पास जो क्षमता और अनुभव है, उससे मुझे एक प्रणाली में आने और फिर से तालमेल बिठाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। यह सब वहां जाने और अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन करने के बारे में है।’’. भाषा.

भारत ने शांति स्थापना में सुधार पहल का लगातार समर्थन किया; उस पर भरोसा है: संरा शांतिरक्षा प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र, पांच दिसंबर (भाषा) संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि सेना और पुलिस योगदान देने वाले अग्रणी देशों में से एक, भारत ने शांति स्थापना अभियानों में सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र की पहल का लगातार समर्थन किया है और विश्व निकाय नयी दिल्ली को शांति स्थापना में एक प्रमुख भागीदार मानता है।. शांति अभियानों के अवर महासचिव ज्यां-पियरे लैक्रोइक्स ने यहां 2023 संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक से पहले पीटीआई-भाषा के साथ एक विशेष साक्षात्कार में भारत के साथ सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में प्रौद्योगिकी, शांति मिशन में महिलाओं की संख्या और भूमिका में वृद्धि और ‘ब्लू हेलमेट’ के खिलाफ अपराध के लिए जवाबदेही पर प्रकाश डाला।. भाषा.

भारत की सफीना हुसैन को मिला ‘वाइज’ पुरस्कार

नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘एजुकेट गर्ल्स’ की संस्थापक सफीना हुसैन को भारतीय गांवों में स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ देने वाली 14 लाख लड़कियों को मुख्यधारा की शिक्षा में वापस लाने के लिए प्रतिष्ठित ‘वाइज’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है और वह पांच लाख डॉलर की इनामी राशि वाला यह पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय महिला हैं।. सफीना ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘जब 16 साल पहले ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के बारे में किसी ने सुना भी नहीं था, तब मैंने स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों को मुख्यधारा की शिक्षा में वापस लाने के लिए एनजीओ (गैर सरकारी संगठन) ‘एजुकेट गर्ल्स’ स्थापित करने का फैसला किया था। भारत में 21वीं सदी में भी ऐसे गांव हैं जहां बकरियों को तो संपत्ति माना जाता है लेकिन लड़कियों को बोझ माना जाता है।’’. भाषा .

शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण और भावनात्मक रूप से मुश्किल भरा रहा हमारा अनुभव : खनन विशेषज्ञ

नयी दिल्ली, दो दिसंबर (भाषा) उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के अभियान में बचाव दल का नेतृत्व करने वाले वकील हसन ने कहा कि उनका अनुभव शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण और भावनात्मक रूप से मुश्किल भरा था।.बचाव अभियान के अपने अनुभव को साझा करते हुए हसन ने ''पीटीआई-भाषा'' को बताया कि उन्होंने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के 12 मजदूरों को इकट्ठा किया तथा उन्हें बारी-बारी से चार से पांच घंटे काम काम करने का निर्देश दिया गया।.बचाव अभियान में शामिल एक अन्य ''रैट होल माइनिंग'' विशेषज्ञ मुन्ना कुरैशी ने ''पीटीआई-भाषा'' से कहा, ''बचाव अभियान के लिए हमें उत्तराखंड बुलाया गया और हमें खुशी है कि हमने काम को पूरा किया। यह देश के प्रति मेरी सेवा भावना है और मुझे इस काम में बिलकुल भी डर नहीं लगा।''.भाषा.